The Nimble Mime Opinions. Expressions. Words.

TagHindi Poem

तिरछी आखों से | #RhythmicWednesday

तिरछी आखों से तुम्हे देखती हूँ , जब तुम खिलखिला के हंसते हो। तुम्हारी हंसी के रंग, एक तस्वीर की तरह, दिल के पन्नो को कुछ यूं रंगते है। तिरछी आखों से तुम्हे देखती हूँ , जब तुम बोलते हो मुझे ड्रामा...

अठखेलियां | #RhythmicWednesday

आज अपने छज्जे पे बैठकर, एक बार फिर देख रही थी आसमान, कर रही थी बचपन की अठखेलियां। ढूंढ रही थी बादलों में, खरगोश का मुँह और फूलों की पंखुड़ियां। आज फिर फ़ोन पे, कर रही थी माँ से बात, और सुन रही थी...

क्यूँ झट बड़े हो गए!

कल ही तो थे छोटे से , क्यूँ झट बड़े हो गए । बचपन की दहलीज लांघ कर , कब बचपने से दूर हो गए । ना रही वो बेफिकरी दुनिया , जो जीती थी संग गुड्डे गुड़िया। एक टॉफी खुश कर देती थी , उस नन्हे से दिल को संतुष्ट...

ये आखें …

ये आखें कितना कुछ कह जाती हैं, बिन कहे ही कहानियां बयां कर जाती हैं ।  सपनो का , ख्वाहिशों का, और , प्यार भरे अफ़्सानो का चित्रण कर जाती हैं ।  खुली रह के बेबाक सपने दिखा जाती हैं , और मन को...

अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो..

कब तक वो नज़रें  मुझे  नज़रों से लूटेंगी ,कब तक मेरी आज़ादी का दम घोटेंगी । क्यूँ है मेरी आज़ादी पे प्रश्नचिन्ह ,क्यूँ सदियां बदली पर बदली ना मेरे प्रति सोच । औरत हूँ, मर्द से...

इक नज़्म तेरे नाम

दिल की कश्ती लेकर हम निकल पड़े ,क्या पता था कि मंज़िल तू है । हम तो बस खामखा जिए जा रहे थे ,क्या पता था कि इस मन की तबस्सुम तू है । लब तक आकर रुक गए जो बोल ,क्या पता था उन लफ़्ज़ों की जुबां...

माँ

तुमने हमको ये जीवन दिया ,अछाई और बुराई का नज़रिया दिया । तुम्हारी उँगली पकड़ कर चलना सीखा ,ममता के आँचल का तुमने बसेरा दिया । चोट मुझे लगी तो याद तुम्हारी आई ,दर्द मेरा देख कर आख़ें...

ज़ज्बात

चाँद सा नूर हो तुम ,मेरे जीने का सुरूर हो तुम । हर पल सोचती हूँ तुम्हे इस क़दर ,कि खुद की रहती ना कुछ ख़बर । तेरा अक्स रहे इन निगाहों में हर दम ,आखें मीचे चलूँ तेरी ओर मै हर क़दम । तेरी बातें करती...

नारी

अर्धनारीश्वर की शक्ति है वो ,स्रजनकर्ता की अद्भुत रचना ।माँ के रूप में ममता की सूरत ,निश्छल प्यार की वो दैवीय मूरत । ठान ले तो बन जाये शक्ति ,करे दानवों की जीवन से मुक्ति । स्रष्टि के सृजन...

निर्भया

मेरे भी कुछ सपने थे,  जो मेरी इन अखियों ने बुने थे, मेरे माँ – बाबू की साँस थी मै ,उनके ताउम्र परिश्रम का ताप थी मैं .ज़िन्दगी जीने की हकदार थी मैं, कुछ बनने  की तमन्ना...

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