अठखेलियां | #RhythmicWednesday

आज अपने छज्जे पे बैठकर, एक बार फिर देख रही थी आसमान, कर रही थी बचपन की अठखेलियां। ढूंढ रही थी बादलों में, खरगोश का मुँह और फूलों की पंखुड़ियां। आज फिर फ़ोन पे, कर रही थी माँ से बात, और सुन रही थी बचपन वाली कहानियां। पंचतंत्र , गीता प्रेस, चम्पक और बाल कृष्णा … Read More

क्यूँ झट बड़े हो गए!

क्यूँ झट बड़े हो गए!

कल ही तो थे छोटे से , क्यूँ झट बड़े हो गए । बचपन की दहलीज लांघ कर , कब बचपने से दूर हो गए । ना रही वो बेफिकरी दुनिया , जो जीती थी संग गुड्डे गुड़िया। एक टॉफी खुश कर देती थी , उस नन्हे से दिल को संतुष्ट करती थी । जब … Read More

ये आखें …

ये आखें कितना कुछ कह जाती हैं, बिन कहे ही कहानियां बयां कर जाती हैं ।  सपनो का , ख्वाहिशों का, और , प्यार भरे अफ़्सानो का चित्रण कर जाती हैं ।  खुली रह के बेबाक सपने दिखा जाती हैं , और मन को नयी जोश उमंगें भर जाती हैं ।  बंद हो करके भी … Read More

अगले जनम मोहे बिटिया ना कीजो..

कब तक वो नज़रें  मुझे  नज़रों से लूटेंगी ,कब तक मेरी आज़ादी का दम घोटेंगी । क्यूँ है मेरी आज़ादी पे प्रश्नचिन्ह ,क्यूँ सदियां बदली पर बदली ना मेरे प्रति सोच । औरत हूँ, मर्द से कमतर समझी जाती हूँ ,अपने अस्तित्व अपने मान के लिए हर पल जल जल जाती हूँ । लोगों  की  ये  सोच  हर … Read More

इक नज़्म तेरे नाम

दिल की कश्ती लेकर हम निकल पड़े ,क्या पता था कि मंज़िल तू है । हम तो बस खामखा जिए जा रहे थे ,क्या पता था कि इस मन की तबस्सुम तू है । लब तक आकर रुक गए जो बोल ,क्या पता था उन लफ़्ज़ों की जुबां तू है । दिल के झरोंखे से देखे थे जो … Read More

माँ

तुमने हमको ये जीवन दिया ,अछाई और बुराई का नज़रिया दिया । तुम्हारी उँगली पकड़ कर चलना सीखा ,ममता के आँचल का तुमने बसेरा दिया । चोट मुझे लगी तो याद तुम्हारी आई ,दर्द मेरा देख कर आख़ें तुम्हारी भर आई । बिना कुछ कहे तुम पढ़ लेती मेरा मन ,मेरे सपने बनते तुम्हारे भूल कर तुम्हारा मन … Read More

ज़ज्बात

चाँद सा नूर हो तुम ,मेरे जीने का सुरूर हो तुम । हर पल सोचती हूँ तुम्हे इस क़दर ,कि खुद की रहती ना कुछ ख़बर । तेरा अक्स रहे इन निगाहों में हर दम ,आखें मीचे चलूँ तेरी ओर मै हर क़दम । तेरी बातें करती हैं मेरी ज़िंदगी को खुशनुमा ,तुझे ही ऱब … Read More

नारी

अर्धनारीश्वर की शक्ति है वो ,स्रजनकर्ता की अद्भुत रचना ।माँ के रूप में ममता की सूरत ,निश्छल प्यार की वो दैवीय मूरत । ठान ले तो बन जाये शक्ति ,करे दानवों की जीवन से मुक्ति । स्रष्टि के सृजन का अभिन्न अंग ,अपनी उदारता से कर दे वो विश्व को दंग । कोमलता में हारे पुष्प भी उससे … Read More

निर्भया

मेरे भी कुछ सपने थे,  जो मेरी इन अखियों ने बुने थे, मेरे माँ – बाबू की साँस थी मै ,उनके ताउम्र परिश्रम का ताप थी मैं .ज़िन्दगी जीने की हकदार थी मैं, कुछ बनने  की तमन्ना में ,हर मुश्किल से जूझ कर ,हर अश्क़ पीने को तैयार थी मैं .ना मालूम किस जुर्म की सज़ा मिली मुझे … Read More