अठखेलियां | #RhythmicWednesday

आज अपने छज्जे पे बैठकर, एक बार फिर देख रही थी आसमान, कर रही थी बचपन की अठखेलियां। ढूंढ रही थी बादलों में, खरगोश का मुँह और फूलों की पंखुड़ियां। आज फिर फ़ोन पे, कर रही थी माँ से बात, और सुन रही थी बचपन वाली कहानियां। पंचतंत्र , गीता प्रेस, चम्पक और बाल कृष्णा … Read More