तिरछी आखों से | #RhythmicWednesday

तिरछी आखों से तुम्हे देखती हूँ ,
जब तुम खिलखिला के हंसते हो।
तुम्हारी हंसी के रंग,
एक तस्वीर की तरह,
दिल के पन्नो को कुछ यूं रंगते है।

तिरछी आखों से तुम्हे देखती हूँ ,
जब तुम बोलते हो मुझे ड्रामा क्वीन ,
हँसी आती है तुम्हारे अल्हड़पन पे ,
मुझे मेरे ड्रामा किंग,
समेट लेती हूं यादों में लम्हे ये हसीन।

तिरछी आखों से तुम्हे देखती हूँ ,
जब तुम कह जाते हो बातें अनकही ।
शब्दों से बड़े तुम्हारे विचार ,
टोह लेते दिल ,
मानवता का प्रतिबिंब होगा आइने में कुछ तुम्हारे जैसा ही।

तिरछी आखों से तुम्हे देखती हूँ ,
जब तुम खिलखिला के हंसते हो।
लगता है सुनहरी धूप आ गयी ,
सर्दी के कोहरे के बाद ,
और गुदगुदा के गयी मन की परतो को।

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