ये आखें …


ये आखें कितना कुछ कह जाती हैं,
बिन कहे ही कहानियां बयां कर जाती हैं । 
सपनो का , ख्वाहिशों का, और ,
प्यार भरे अफ़्सानो का चित्रण कर जाती हैं । 

खुली रह के बेबाक सपने दिखा जाती हैं ,
और मन को नयी जोश उमंगें भर जाती हैं । 
बंद हो करके भी ,
दूसरे जहां की सैर कर आती हैं । 

मुस्कुराती हैं तो चमक दिल थाम लेती है ,
गुनगुनाती हैं , तो कोयल भी शरमा जाती है । 
छलकती हैं ज़ब ज़ी भर के ये ,
तो अपने ही दिल पे हल्का मरहम सा लगा जाती हैं । 

लजाती हैं , तो क़यामत सी ढल जाती है ,
इतराती हैं तो मख़मली शरारत से भर जाती हैं । 
ज़ुल्मी ये सरेआम क़त्ल कर आती हैं ,
और हस के महफ़िल -ए -जान  हो जाती हैं । 

ये आखें कितना कुछ कह जाती हैं,
बिन कहे ही कहानियां बयां कर जाती हैं । 
चित्र आभार : गूगल 

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