India’s Daughter – Fight for Justice


मैं एक फूल या तराशा हुआ पत्थर या एक वस्तु ना थी ,

थी एक जीती जागती इंसान जिसमे सांसें धड़कती थीं । 

क्या था मेरा दोष जिसकी ऐसी सज़ा सामने आई ?
या मैं ये समझूँ कि “लड़की” होने की मैंने कीमत चुकाई । 

ये दुनिया ये लोग तब भी मेरी मदद ना कर पाये ,
पर आज भी है मौका वो हाथ बढ़ाने का । 

मत झगड़ो मेरी कहानी पे ! मेरे अस्तित्व का अब नाम-ओ-निशां नहीं बाकी 
लड़ो लोगों की मानसिकता से , ना मिटे किसी और का अस्तित्व ताकि । 

लड़ सकते हो तो लड़ो उन हैवानो से , कराओ उन्हें गलती का एहसास ,
कोई ऐसी सोच का दम ना भर सके , ऐसा दिलाओ न्याय । 

माँ , उस दिन की याद अब भी दिल दहलाती है ,
उन ज़ख्मों के दर्द से आँखें सिसक सिसक जाती हैं ।

माँ , मेरी मौत को व्यर्थ ना होने देना ,
इन दरिंदो की जीत का जश्न ना होने देना । 

मेरे ख़ून और तुम्हारे आँसुओं को सूखने ना देना ,
मेरी जैसी अनगिनत निर्भया को ऐसे ज़ुल्म अब सहने मत देना । 

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Translated version for my english readers

I was not a flower, a gem or an object,
I was a living person who used to breathe.

What was my crime that i got such punishment,
Or I paid the cost of being a  “girl”.

These people, this world couldn’t help me
But today also they have a chance to help me.

Don’t fight over my featured story, I am not alive anymore.
Fight with the mindset if you want to, it should not make other girls die.

Fight with those devils if you want, make them realise their fault,
Give me such justice that nobody ever think of committing such crime.

Mother, those memories shiver me today as well,
Those wounds make me cry.

Mother, my death should not go waste,
Don’t let these evil people win.

Don’t let your tears and my blood go waste,
Don’t let any other nirbhaya go through these incidents.

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