India’s Daughter – Fight for Justice

मैं एक फूल या तराशा हुआ पत्थर या एक वस्तु ना थी , थी एक जीती जागती इंसान जिसमे सांसें धड़कती थीं । क्या था मेरा दोष जिसकी ऐसी सज़ा सामने आई ?या मैं ये समझूँ […]

निर्भया

मेरे भी कुछ सपने थे,  जो मेरी इन अखियों ने बुने थे, मेरे माँ – बाबू की साँस थी मै ,उनके ताउम्र परिश्रम का ताप थी मैं .ज़िन्दगी जीने की हकदार थी मैं, कुछ बनने  की तमन्ना में […]