क्यूँ झट बड़े हो गए!

कल ही तो थे छोटे से ,क्यूँ झट बड़े हो गए ।बचपन की दहलीज लांघ कर ,कब बचपने से दूर हो गए । ना रही वो बेफिकरी दुनिया ,जो जीती थी संग गुड्डे गुड़िया। एक […]

ये आखें …

ये आखें कितना कुछ कह जाती हैं, बिन कहे ही कहानियां बयां कर जाती हैं ।  सपनो का , ख्वाहिशों का, और , प्यार भरे अफ़्सानो का चित्रण कर जाती हैं ।  खुली रह के […]

ज़ज्बात

चाँद सा नूर हो तुम ,मेरे जीने का सुरूर हो तुम । हर पल सोचती हूँ तुम्हे इस क़दर ,कि खुद की रहती ना कुछ ख़बर । तेरा अक्स रहे इन निगाहों में हर दम […]

नारी

अर्धनारीश्वर की शक्ति है वो ,स्रजनकर्ता की अद्भुत रचना ।माँ के रूप में ममता की सूरत ,निश्छल प्यार की वो दैवीय मूरत । ठान ले तो बन जाये शक्ति ,करे दानवों की जीवन से मुक्ति । स्रष्टि […]